बुधवार, जून 03, 2026

राष्ट्र का स्वाभिमान और कूटनीति: तस्वीरों से आगे की हकीकत हो स्पष्ट

वैश्विक इतिहास में ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि भारतीय तिरंगे को इतनी बेइज्जती झेलनी पड़ी हो, 1947 से पहले यदि ऐसी परिस्थितियों से हम रूबरू हुए तो अंग्रेजी शासन का दौर जो कि दमनकारी नीतियों पर आधारित था और अपनी सत्ता में कोई किसी दूसरे का राष्ट्र ध्वज क्यों फहरने दे? 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद हम तथाकथित विश्वगुरु बन गये थे... मोदी द्वारा शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो विश्व के नक्शे पर जहां इनके नमूने हम सभी को न देखने को मिले और हर बार हम सिर्फ शर्मसार होते आए हैं, और हद तो तब हो गई जब विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधान दांत चियारते हुए मैलोडी पर अपनी गरिमा धूर धूमिल कर रहा और ठीक उसके बाद तिरंगे का दिख रहे इस वीडियो में अपमान शायद ही कभी हुआ, लेकिन मजाल है कि विश्वगुरु के मुंह से एक शब्द निकला हो। आपके दोस्त ट्रम्प के देश अमेरिका में भारत की शान और पहचान तिरंगा 🇮🇳 फाड़ कर देश का अपमान किया जा रहा है उस पर आपकी अब भी चुप्पी क्यों है? कभी ट्रम्प भारत को नरक बोल देता है, और कभी उसी के देश में हमारे सम्मान का प्रतीक अपमानित होता है फिर भी आपके रिश्तों में मिठास ही क्यों दिखाई देती है? देश अब पूछ रहा है आख़िर स्वाभिमान के मुद्दों पर सख्त और सीधा संदेश कब जाएगा, और कब सिर्फ तस्वीरों से आगे बात बढ़ेगी? हाल के वर्षों में वैश्विक राजनीति में भारत की उपस्थिति और उसकी विदेश नीति को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। विश्वगुरु और मजबूत भारत की इस छवि के बीच जब विदेशों से राष्ट्र के प्रतीकों के अपमान की खबरें या तस्वीरें सामने आती हैं, तो वह देशवासियों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुँचाती हैं। विशेष रूप से अमेरिका जैसे मित्र देशों में, जहाँ भारतीय प्रवासियों की एक बड़ी संख्या रहती है और जिसे भारत का एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार माना जाता है, वहाँ राष्ट्रीय ध्वज का अनादर होना बेहद चिंताजनक है। लोकतंत्र में जनता का यह पूछना स्वाभाविक है कि यदि द्विपक्षीय संबंध इतने प्रगाढ़ हैं, तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर तात्कालिक और कड़ी कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती? एक तरफ जहाँ रणनीतिक साझेदारी की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी नेतृत्व द्वारा कभी-कभी भारत की आंतरिक परिस्थितियों को लेकर असहज करने वाली टिप्पणियाँ की जाती हैं। जब राष्ट्र के मान-सम्मान या तिरंगे के अपमान का मामला हो, तो देश की जनता सरकार से केवल पर्दे के पीछे की बातचीत (Backchannel Diplomacy) की उम्मीद नहीं करती, बल्कि एक स्पष्ट और कड़ा सार्वजनिक रुख देखना चाहती है। तस्वीरों से आगे बढ़कर ठोस संदेश की आवश्यकता है। भारत एक संप्रभु और स्वाभिमानी राष्ट्र है। वैश्विक नक्शे पर अपनी पैठ बनाना और हर देश से मजबूत आर्थिक संबंध रखना समय की मांग है, लेकिन यह सब राष्ट्रीय गरिमा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। समय आ गया है कि भारत की विदेश नीति केवल द्विपक्षीय दौरों, भव्य स्वागत समारोहों और तस्वीरों तक ही सीमित न रहे। यदि कोई भी देश चाहे वह कितना भी बड़ा मित्र क्यों न हो भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का अनादर करने वाले तत्वों को अपने यहाँ पनाह देता है या उन पर ढीला रुख अपनाता है, तो भारत सरकार को बिना किसी संकोच के एक सख्त और सीधा कूटनीतिक संदेश देना होगा। राष्ट्र का स्वाभिमान सर्वोपरि है, और कूटनीति में इसकी झलक साफ दिखनी चाहिए। जय हिन्द

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